वैसे तो मैं सिगरेट नहीं पीता पर यहां रोज़ 30 से 40 सिगरेट पीना पड़ता है....

Ashutosh Jha
0


वैसे तो मैं सिगरेट नहीं पीता लेकिन दिल्ली-एनसीआर में रह कर रोज मजबूरन ३० से ४० सिगरेट पीना पड़ रहा है। जी हाँ और यहाँ मैं ही नहीं हूँ जिसे मजबूरन ऐसा करना पड़ रहा है बल्कि इसमें आप सब भी शामिल है और आप लोगो के बच्चे भी शामिल है।इसमें वो छोटे बच्चे भी शामिल है जिनका शायद एंटी पॉलुशन मास्क भी नहीं मिलता होगा बाजार में। दिल्ली में यमुना नदी तो वैसे ही साफ़ नहीं थी अब हवा में भी गंदगी फैला दी गयी। 


आखिरकार वो दिन आ ही गए जब लोगो को बाहर निकलने पर मास्क लगाना पड़ रहा है। चलो लोगो के रोजगार का नया जरिया तो बन गया। अरे रोज़गार ही नहीं एक और अच्छी बात हुई है धुएं के चलते डेंगू के मच्छरों ने अपना दम तोड़ दिया।अब डेंगू का खतरा बेहद कम हो गया है अच्छी हवा मिले न मिले किसे फ़र्क़ पड़ता है।और हाँ एक बात बता दू हाल ही में पता चला था की दिल्ली-एनसीआर सबसे प्रदूषित शहरो में से था।खैर अभी कुछ दिन और सिगरेट पीना पड़ेगा क्योंकि अभी ऐसे ही गैस चैम्बर रहने वाला है हमारा शहर।


जब दूसरे राज्यों से दिल्ली आए लोगो से बात की तब उनमे से कई लोगो ने आँखों में जलन होने की समस्या बताई। मैंने उन्हें चश्मा पहनने की सलाह दी। उसके बाद उनमे से कई लोगो ने सांस लेने में दिक्कत की बात की मैंने उन्हे मास्क लगाने की सलाह दी। फिर उन्होंने पूछा कौन सी कंपनी का मास्क अच्छा होगा। तब एहसास हुआ की एक समय था जब हमारी नदियाँ साफ़ हुआ करती थी। हम नदियों का पानी सीधे पी जाते थे। अब वो समय आ गया है की जब फलाना कंपनी युवी प्रोटेक्शन देती है ढिमकाना कंपनी पानी मीठा करती है और भी बहुत कुछ। ठीक वही चीज़ हवा के लिए भी आ चूकी है। 


कुछ लोगो ने बताया की उनकी आँखे शायद कमजोर हो गयी है उन्हें दूर की चीज़े नहीं दिख रही है अब उन्हें क्या पता की दूर की चीज़े फोग (fog) की वजह से अरे माफ़ करियेगा स्मोग (smog) की वजह से नहीं दिख रही।  


ऐसा नहीं है की दिल्ली एनसीआर में पेड़ो की कमी है, न बिलकुल नहीं बल्कि देश में जागरूकता की कमी है, देश में शिक्षा की कमी है, देश में प्रबंधन की कमी है, देश में अनुशाशन की कमी है। हमें तो ये भी नहीं पता की इस हवा में रहने से कितने अधिक दुष्प्रभाव होंगे और कब तक दिखेंगे।


अब तो उम्रदराज़ लोग ही नहीं बल्कि युवा पीढ़ी के भी कई लोगो का ये सोचना है की दिल्ली अब रहने लायक नहीं है।कितने लोग तो दिल्ली के बहार घर बनाने की सोच रहे है। एक समय था जब आसमान में तारें दिखा करते थे अब तो घर के बाहर चिड़िया भी ची-ची करते हुए नहीं दिखाई पड़ती।


बांग्लादेशी क्रिकेटरों  द्वारा मास्क प्रयोग करके खेलने की तस्वीरो ने विदेशो में भी भारत की स्थिति जाहिर कर दी है। इ-सिग्रेटे तो बैन कर दिए गए पर प्रदूषण का क्या करे। अब वो समय आ गया है की पर्यावरण के ऊपर सख्त निर्णय लिया जाए और सब मिल कर काम करे। नेताओं को एक दूसरे पर इलज़ाम लगाना बंद करके प्रदूषण के रोकथाम के बारे में सोचना होगा। केंद्र सरकार और राज्य सरकार को मिल कर काम करना ही पड़ेगा।


चलिए जो भी हो अभी के लिए जरुरत पड़ने पर ही बाहर निकले और मास्क लगाकर निकले। छोटे बच्चे और बुजुर्ग अभी घर से बाहर न ही निकले तो सही है।सबसे अच्छी चीज़ ये होगी की आप छुट्टियों में किसी अप्रदूषित क्षेत्र में छुट्टीयों के लिए चले जाए इससे आपको अच्छा महसूस होगा।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Accepted !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top