Type Here to Get Search Results !

सेवानिवृत हुए जस्टिस रंजन गोगोई को कई बड़े फैसलों के लिए याद किया जायेगा

0


अयोध्या भूमि विवाद में जस्टिस रंजन गोगोई को का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। अपने आखिरी कार्य दिवस पर उन्होंने 4 मिनट में 10 नोटिस जारी कर दिया इसके बाद मौन मंत्र भी दे गए। उन्होंने पत्रकारों से  बात करने से मना कर दिया और अपने सचिव से सन्देश भिजवा दिया उसमे पत्रकारों और मीडिया से जिम्मेदारी से भूमिका निभाने पर धन्यवाद कहा और आगे उन्होंने कहा बेंच चाहती है कि जज शांत रहे। पर ऐसा नहीं है कि जज नहीं बोलते वह काम के सिलसिले में ही बोलते हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं।कड़वे सच स्मरण में ही रहने चाहिए।


जस्टिस गोगोई को बड़े फैसले लेने के लिए याद किया जाएगा। जस्टिस गोगोई ने शुक्रवार को सभी हाई कोर्ट के 650 जजों ,15000 न्यायिक अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बदौलत संबोधित भी किया। रंजन गोगोई थे जिन्होंने  161 साल से लंबित श्री राम जन्मभूमि विवाद का निपटारा किया।


जब जस्टिस काटजू को नोटिस भेजा गया था 


एक बार की बात है जस्टिस रंजन गोगोई ने जस्टिस काटजू को कोर्ट में बुला लिया था। काटजू ने केरल के सौम्या बलात्कार कांड में कोर्ट के फैसले की आलोचना की थी। जस्टिस गोगोई ने इसे कोर्ट की अवमानना की तौर पर लिया था और उन्हें कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस दिया था। इतिहास में यह पहली बार हुआ था जब शीर्ष कोर्ट का कोई पूर्व जज कोर्ट में ऐसे पेश हुआ । 


जस्टिस गोगोई का परिचय 


जस्टिस गोगोई 18 नवंबर 1954 को जन्मे थे वह 1978 में पहली बार काउंसिल से जुड़े थे। 3 अक्टूबर 2018 को बतौर मुख्य न्यायाधीश उन्होंने पदभार ग्रहण किया था। शुरुआत  गुवाहाटी हाई कोर्ट से की थी 2001 में गुवाहाटी हाई कोर्ट में जज भी बने। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में बतौर जज 2010 में नियुक्त हुए थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में 10 सालों में पहला मौका था कि शीर्ष कोर्ट में जजों की एक भी खाली जगह नहीं रही। उनके कार्यकाल में कोर्ट में सभी 34 पदों पर जज की नियुक्ति की गई थी। 


जिन कारणों से जस्टिस गोगोई ने इतिहास रच दिया


ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से जस्टिस गोगोई को याद किया जाएगा उनमें से पहला कारण यह है कि कार्यालय आरटीआई के दायरे में लाने के लिए गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने फैसला सुनाया था।


सबरीमाला केस में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की थी। गोगोई और पीसी घोष की पीठ ने सरकारी विज्ञापनों में नेताओं की तस्वीर लगाने पर पाबंदी लगा दी थी।


अंग्रेजी और हिंदी समेत सात भाषाओं में कोर्ट के फैसलों को प्रकाशित करने का फैसला गोगोई नहीं लिया था इससे पहले तक शीर्ष अदालत के फैसले से अंग्रेजी में ही प्रकाशित किए जाते थे अब पैसे अंग्रेजी और हिंदी समेत सात भाषाओं में आएंगे।


योध्या मामले की सुनवाई को पूरा कर उन्होंने देश में चल रहे एक बोहत बड़े मुद्दे को जड़ से ख़तम कर दिया। 


राफेल में क्लीन चिट सरकार को उन्होंने ही दिया था और ऐसा एक बार नहीं बल्कि दो बार किया था।


Post a comment

0 Comments

Top Post Ad

Below Post Ad