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रंजन गोगोई के राज्यसभा जाने को लेकर ओवैसी ने लिख दी ऐसी बात कि सब को गूगल करना पड़ा

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई को 16 मार्च की शाम को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। इसके बाद तो लोगों की प्रतिक्रियाएं धमाके की तरह आनी शुरू हो गयी।उनके सेवानिवृत होने के कुछ ही दिन बाद उनके नामांकन पर सवाल खड़े हो गए।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी उन पर सवाल खड़े किए


इसके लिए असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीटर का सहारा लिया।


उन्होंने ट्विटर पर लिखा-



क्या ये की गई मदद का इनाम है? लोगों का जजों की आज़ादी पर भरोसा कैसा रहेगा? कई सवाल हैं। 


ओवैसी का "ये की गयी मदद" का आशय सरकार की मदद की जाने के ऊपर है। 


इस ट्वीट के साथ हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने एक फोटो अटैच की थी। जिसमें गृह मंत्रालय का नोटिफिकेशन है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रंजन गोगोई को राज्यसभा सदस्य के लिए मनोनीत किया है। 


आखिर ये Quid Pro Quo (क्विड प्रो कुओ) क्या होता है?


ओवैसी ने अपने ट्वीट के शुरू में लिखा है की  ‘Quid Pro Quo’ (क्विड प्रो कुओ) लैटिन भाषा के शब्द हैं। इसका मतलब होता है, एक चीज़ के बदले में कोई दूसरी चीज देना या कुछ बराबर सा लेन-देन। गूगल ट्रांसलेटर में हिंदी में इसका मतलब "मुआवज़ा" लिखा है। 


आखिर कौन हैं रंजन गोगोई?


रंजन गोगोई के पिता केशब चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जस्टिस गोगोई नार्थ ईस्ट से आने वाले पहले चीफ जस्टिस थे।


रंजन गोगोई के पिता ने कहा भी था मेरा पुत्र पढ़ने में अच्छा है और कुछ बड़ा जरूर करेगा। और सुप्रीम कोर्ट के 46वें चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई का कार्यकाल करीब साढ़े 13 महीने का रहा था और इस दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए थे  इनमें से अयोध्या भूमि विवाद, सबरीमाला मामला, चीफ जस्टिस का ऑफिस पब्लिक अथॉरिटी, सरकारी विज्ञापन में नेताओं की तस्वीर पर पाबंदी, अंग्रेजी और हिंदी समेत 7 भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को प्रकाशित करने का फैसला प्रमुख रहा। 


 


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