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कोरोनावायरस के बीच किस तरह काम-काज शुरू किया जाए

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कोरोनावायरस के इस महायुद्ध से लड़ाई कब तक चलेगी इसका अभी पता नहीं और लॉकडाउन में लम्बे समय तक हम रह नहीं सकते। तो हमें इस तरह इसके साथ जीना पड़ेगा -


अनुशासन 


अनुशासन से जुड़े इन बिंदुओं का पालन करके हम कोरोना के महायुद्ध के बीच काम भी करेंगे और इकॉनमी भी बचाएंगे।


1. समय का चयन


समय के आधार पर काम करना होगा।काम को दो शिफ्ट में करने की जरुरत है। सुबह का शिफ्ट और रात का शिफ्ट।


जैसे सुबह की शिफ्ट में आधे लोग 7 घंटे काम कर रहे है। बाकी के लोग रात की शिफ्ट में काम कर रहे है।


सुबह वालों की शिफ्ट के लोगों को ऑफिस से घर जाने का 2 घंटे का समय माना जाता है। उसके बाद ही दूसरी शिफ्ट वाले अपने घर से बहार निकलेंगे।


इन सब में समय को मानना बेहद जरुरी है।


2.  24*7 की पौलिसी


अब अगर आधे से कम लोगों द्वारा काम करना है तो 24*7 की पौलिसी को फॉलो करना होगा। जिसमे काम तो हर दिन 24 घंटे चलेगा परन्तु काम करने वालों को छुट्टी पर्याप्त मिलेगी। ये होगा जब ये निश्चित किया जायेगा की कितने लोग किस दिन और कब(सुबह या शाम) काम करेंगे।


ऐसा करने से फायदा क्या है?


भारत का बड़ा हिस्सा आज भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से काम पर जाता है। एक ऑटो में 11 लोग ठूस कर बैठे होते है। इससे क्या होगा कम जनसँख्या से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करना सुरक्षित रहेगा। किन्तु ये सुनिश्चित कराया जाना चाहिए की कंपनियां खुद ही ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कराये और एक सीट पर बैठने के बाद उसके बाजू वाली सीट खाली हो। 


3. जोन वाइज समय का चयन


इसमें आपको समय का निर्धारण करना होगा की कहा कितने बजे बस चलेगी। और कितने बजे छोड़ेगी। और बस में कंडक्टर को यह सुनिश्चित करना होगा की सोशल डिस्टन्सिंग को फॉलो किया जा रहा है या नहीं।  


उसी समय के आधार पर कम्पनीज में काम शुरू होगा। 


अगर कंपनी खुद ही ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर रही है तो उसे अपने हिसाब से समय सुनिश्चित करने का अधिकार है। परन्तु सोशल डिस्टन्सिंग को ध्यान में रखना जरुरी है। 


कंपनी के पास ये सुनिश्चित करने का अधिकार हो की सुबह कौन काम करेगा और शाम को कौन से वर्कर काम करेंगे। 


मेट्रो में भी एक ट्रैन के लिए नियमित लोगों को ही टिकट दी जाये। जिससे सभी को डिस्टेंस पर बैठने की व्यवस्था की जा सके। कोई भी खड़ा न हो। 


सुरक्षा के मद्देनज़र 


सब वर्कर खाना घर से ही लाये, कोई भी बहार का खाना न खाये। 


सबके सैनेटाइजेशन की व्यवस्था हो।


प्रॉपर मास्क और आँखों के ढकने के बाद ही कंपनी में काम करने की आज्ञा मिले। 


खाना खाने से पहले हाथ जरूर सैनेटाइज किया जाए। 


कोशिश करें की अपना पानी लाये और अपना ही पानी पिए। 


काम करते समय अपने मास्क को ठीक करने की कोशिश न करे।  


दूसरों से हाथ मिलाने की जगह नमस्ते करें। 


इन सब चीज़ों की नियमित जांच हो।


टेक्नोलॉजी 


ये सुनिश्चित किया जाए की सभी के पास उनके तंदरुस्त होने का प्रमाण है की नहीं। ये प्रमाण आरोग्य सेतु ऍप या किसी अन्य तरीके से किया जा सकता है। 


मीटिंग्स को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के द्वारा ही करने की कोशिश करें। 


हम सब भारतियों को अनुशासन का पालन करने की आवश्यकता है। याद रखिये हम 1857 में ही आजाद हो जाते परन्तु हममें अनुशासन की कमी थी। निश्चित समय पर आक्रमण नहीं हुआ। कोरोना के इस महायुद्ध को जीतने में समय एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। अनुशासन बेहद जरुरी है। 


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