AK vs YOGI : इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई के लिए दिल्ली के कई छात्रों को आज भी उत्तर प्रदेश का रुख करना पड़ता है

NCI
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Arvind Kejriwal

आप पार्टी ने जब से यूपी में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है तब से आप पार्टी ने यूपी के स्कूलों पर बयान देना शुरू कर दिया है। दिल्ली और यूपी के सरकारी स्कूलों की तुलना किया जाना आसान नहीं है। क्योंकि दिल्ली में जितने स्कूल है उससे 10 गुना से भी ज्यादा स्कूल उत्तरप्रदेश में है। आपको बता दे की दिल्ली में लगभग 1229 स्कूल है और अगर यूपी की बात करे तो यहाँ लगभग डेढ़ लाख सरकारी स्कूल है।


दिल्ली के डिप्टी चीफ मिनिस्टर और आप नेता मनीष सीसोदिया ने कहा है की वह यूपी आएंगे और जो भी उनको बहस का प्रस्ताव देना चाहता है दे सकता है। हम अगर यूपी में जीतेंगे तो यूपी के सरकारी स्कूल दिल्ली की तरह ही हो जायेंगे। 

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आपको ये तथ्य जानकर आश्चर्य होगा की दिल्ली आज भी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज की कमी पूरी करने में असमर्थ है। दिल्ली से यूपी आने वाले विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। दिल्ली के छात्रों के लिए यूपी ही एक एजुकेशन हब की तरह है। यूपी के तीन महत्वपूर्ण शहर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाज़ियाबाद दिल्ली के छात्रों को उच्च शिक्षा देने में मदद करता है।

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दिल्ली में छात्रों की संख्या के हिसाब से कॉलेजेस की भारी कमी है। ऐसे में दिल्ली के छात्र नोएडा, गाज़ियाबाद का रुख करते है। हमारी टीम ने कई छात्रों से इस बारे में बात की उनमे से एक छात्र जो नोएडा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढता है ने कहा " मेरा घर बहुत दूर है मुझे कॉलेज के लिए बहुत जल्दी निकलना होता था। उसके बाद जब घर को जाता था तो रात हो जाती थी।"

"शुरू में तो वैशाली मेट्रो स्टेशन पर उतरना पड़ता था फिर उसके बाद शेयरिंग ऑटो लेना पड़ता था लेकिन अब जब कॉलेज तक मेट्रो आ गयी है तब सफर आसान हो गया।"    
 
एक और छात्र जो ग्रेटर नोएडा के कॉलेज में पढ़ते है ने कहा " मुझे तो काफी दिक्कत आती थी, मै हमेशा कॉलेज देर से पहुंचता था और जब भी देर से पहुंचता था टीचर देर होने की वजह पूछते थे और मैं ट्रैफिक बोल देता था। "

"कॉलेज आने में मुझे लगभग दो घंटे लगते थे। मेट्रो आने से थोड़ी सहूलियत हो गयी है। मेट्रो में  समय का पता नहीं चलता लेकिन फिर भी 2 घंटे तो आराम से सफर में बीत जाते है। इस हिसाब से दिन के चार घंटे तो सफर में ही बीत जाते है और कभी कभी तो इससे भी ज्यादा समय लग जाता था। "    

दिल्ली में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज की कमी के चलते छात्रों को यूपी का रुख करना पड़ता है। इतना ही नहीं जब नौकरी की बात आती है तो यूपी इसमें भी पीछे नहीं है। दिल्ली के छात्रों को रोजगार देने में भी यूपी का हाथ रहा है। सिर्फ यूपी ही नहीं हरियाणा के शहर गुरुग्राम ने भी कई दिल्ली वालों को नौकरियां दी है।

ये देखना आनंदभरा होगा की आप और बीजेपी और किन मुद्दों पर आमने सामने होती है। शिक्षा का मुद्दा तो पहला मुद्दा है और भी आगे कई मुद्दे आने है। एक बात तो तय है की इस बार 2022 में होने वाले यूपी के चुनाव पर सबकी नज़र रहने वाली है। 

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