India Defense Update : आईएनएस विशाल के लिए एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ का डिजाइन

NCI
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आज की इस आर्टिकल में हम लोग बात करेंगे एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ के बारे में। लीमा 2019 में, जो कि मलेशिया में हुआ था, वहां पर बीआई सिस्टम ने आईएनएस विशाल के लिए एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ का कस्टमाइज वेरिएंट भारत को ऑफर किया था और  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत आने वाले हैं तो यह उनके एजेंडे में एक चीज हो सकती है।

वैसे अगर देखा जाए तो बोरिस जॉनसन के एजेंडे में सबसे ऊपर ट्रेड डील होगी और नंबर दो पर कोरोनावायरस की वैक्सीन और इस बात का भी काफी अनुमान  है कि वह डिफेंस डील भी लेकर आएंगे और ऐसे में आईएनएस विशाल के लिए एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ का डिजाइन डील में हो सकता है। वैसे विशाल को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है। जो भी न्यूज़ आई है उसमें कहीं भी विशाल को कैंसिल करने की बात नहीं की गई है। हालांकि इस प्रोजेक्ट में देरी होगी और यह एयरक्राफ्ट कैरियर थोड़े दिन बाद बनाया जाएगा ठंड के चलते इसे अभी शुरू नहीं किया जा सकता। लेकिन यह प्रोजेक्ट कैंसिल नहीं होगा आने वाले समय में यह क्राफ्ट बनाया जाएगा।  

आइए जाने की क्या एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ का डिजाइन भारत के लिए सही रहेगा?

एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ 65 हजार टन का एक सुपर  कैरियर है  इसमें एक इंटीग्रेटेड प्रोपल्शन सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। इसमें रॉयल रॉयस मरीन के 36 मेगा वाट के दो MT30 गैस टरबाइन अल्टरनेटर है और चार 10 मेगावाट के डीजल इंजन है। इनकी मदद से यह एयरक्राफ्ट कैरियर 32 नोट्स की स्पीड के साथ में 19000 किलोमीटर आसानी से ट्रेवल कर सकता हैं।

ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कैरियर के ऊपर से लॉकहीड मार्टिन एफ-35 लाइटनिंग II ऑपरेट किए जाएंगे जो इस एयरक्राफ्ट कैरियर को और भी खतरनाक बना  देगा। अगर एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ के डिजाइन को देखा जाए तो यह भारतीय रिक्वायरमेंट के हिसाब से बहुत अच्छा डिजाइन है और जैसा कि आप सब जानते हैं कि भारतीय नौसेना भी जाती है कि आईएनएस विशाल एक 65000 टन का एक सुपर कैरियर हो इसलिए एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ भारतीय नौसेना की रिक्वायरमेंट में पूरी तरह सक्षम है।   

एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ में आई समस्या 

आपको बता दे की हाल ही में रॉयल नेवी के अरब पाउंड के विमान वाहक एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ और प्रिंस ऑफ वेल्स को अपने अत्याधुनिक रडार सिस्टम में एक समस्या दिखी जिसके कारण हमला करने के लिए असुरक्षित माना गया । क्रिसमस से ठीक पहले रडार सिस्टम के परीक्षण के बाद सॉफ्टवेयर कठिनाइयों की सूचना मिली।पर यह उम्मीद लगाई जा रही है की ऐसी समस्या कभी कभी देखने को मिल ही जाती है।

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