भारत को रूस के साथ नहीं देख सकता अमेरिका

NCI
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पेंटागन ने कहा है कि अमेरिका भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर भरोसा करने के लिए मना करता रहता है।पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने कहा, "हम भारत के साथ-साथ अन्य देशों के साथ भी बहुत स्पष्ट हैं कि हम उन्हें रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर नहीं देखना चाहते हैं। हम इसके बारे में स्पष्ट हैं और इसे बार बार बोलते भी रहते है।"लेकिन हम भारत के साथ रक्षा साझेदारी को भी बहुत महत्व देते हैं और आगे भी देते रहेंगे क्योंकि ये जरुरी है। भारत इंडो पैसेफिक में सुरक्षा मुहैया कराने वाला देश है  और हम इस चीज़ को महत्त्व देते है। 

 
भारत अपनी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखता है

अक्टूबर 2018 में, भारत ने तत्कालीन ट्रम्प प्रशासन की चेतावनी के बावजूद अपनी वायु रक्षा को बढ़ाने के लिए एस -400 ट्रायम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की पांच यूनिट को खरीदने के लिए रूस के साथ 5 बिलियन अमरीकी डालर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जिसमे से दो यूनिट भारत आ भी चुकी है लेकिन अभी तक अमेरिका ने भारत पर कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाया है। इसके अलावा भी भारत ने अपना रुख साफ़ कर के कहा है की भारत अपनी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखता है। 

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तुर्की पर एस-400 के कारन लगा था प्रतिबन्ध

रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणालियों के एक बैच की खरीद के लिए अमेरिका पहले ही अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डेरेक चॉलेट (सीएएटीएसए) अर्थात "काटसा" के तहत तुर्की पर प्रतिबंध लगा चुका है।

अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डेरेक ने गुरुवार को कहा था कि बाइडेन प्रशासन भारत के साथ काम करने के लिए बहुत उत्सुक है क्योंकि यह अपनी रक्षा क्षमताओं और रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाता है।

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